21 अक्टूबर 2026 - 18:46
अमेरिका की सऊदी अरब को चेतावनी, हमारी अनुमति के बिना यूरेनियम संवर्धन न करे 

यह चेतावनी अमेरिका के राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (NNSA) में रक्षा क्षेत्र के परमाणु अप्रसार विभाग के उप निदेशक मैथ्यू नेपोली ने कार्नेगी फाउंडेशन में अपने संबोधन के दौरान दी।

वॉशिंगटन: अमेरिका ने सऊदी अरब को चेतावनी दी है कि अगर रियाज ने अपने स्तर पर यूरेनियम संवर्धन की क्षमता विकसित करने की कोशिश की, तो इसे दोनों देशों के बीच हुए परमाणु सहयोग समझौते का उल्लंघन माना जा सकता है। इससे अमेरिका और सऊदी अरब के बीच परमाणु सहयोग खत्म होने का खतरा पैदा हो सकता है।

यह चेतावनी अमेरिका के राष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा प्रशासन (NNSA) में रक्षा क्षेत्र के परमाणु अप्रसार विभाग के उप निदेशक मैथ्यू नेपोली ने कार्नेगी फाउंडेशन में अपने संबोधन के दौरान दी।

मैथ्यू नेपोली ने कहा कि सऊदी अरब के साथ परमाणु सहयोग जारी रखने के लिए परमाणु अप्रसार के कड़े नियमों का पालन करना जरूरी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सऊदी अरब स्वतंत्र रूप से यूरेनियम संवर्धन की क्षमता विकसित करने की कोशिश करता है, तो यह अमेरिका के साथ हुए तथाकथित '123 समझौते' का उल्लंघन माना जा सकता है। इससे दोनों देशों के परमाणु सहयोग पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, इस समझौते के तहत वॉशिंगटन को सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए विशेष अधिकार मिलते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के साथ किए गए व्यापक सुरक्षा समझौते का उल्लंघन करता है या अमेरिका की निगरानी व्यवस्था का पालन नहीं करता, तो दोनों देशों के बीच सभी प्रकार का परमाणु सहयोग तुरंत रोका जा सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले जुलाई के अंत में सऊदी अरब की सरकार के साथ परमाणु सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

इस समझौते का उद्देश्य अगले 30 वर्षों तक सऊदी अरब में परमाणु ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित करने में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी का रास्ता खोलना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस समझौते को लागू करने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की औपचारिक मंजूरी जरूरी नहीं है। हालांकि, कानून निर्माताओं की समीक्षा और आपत्ति के लिए 90 दिनों की अवधि निर्धारित है। इस अवधि के पूरा होने से पहले समझौता लागू नहीं होगा।

इस दौरान अमेरिकी सांसद समझौते की शर्तों की समीक्षा कर सकते हैं और इसे लागू होने से रोकने के लिए कदम उठा सकते हैं।

अमेरिका चाहता है कि सऊदी अरब का परमाणु कार्यक्रम कड़ी अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रहे। यूरेनियम संवर्धन की तकनीक परमाणु ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल हो सकती है, लेकिन संवर्धन का स्तर बढ़ने पर इसका इस्तेमाल परमाणु हथियारों के लिए जरूरी सामग्री तैयार करने में भी हो सकता है। इसी वजह से वॉशिंगटन इस मामले में सख्त शर्तें लागू करना चाहता है।

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